Friday, December 24, 2010

हरे पीले नीले लाल कडकडे नोटों में असली नकली के पहचान के लिए गांधीजी के चित्र की आवश्यकता पड़ रही है. ये देश की भलमनसाहत है की इस बहाने हर नागरिक  बापू से जुड़ा  है. वर्ना बापू को याद रखना, उतना ही भारी है जितना आज के बच्चों के लिए सुबह सवेरे जागना है. बापू से सभी प्रेम करें इसकी आशा बापू ने तो कभी नहीं की होगी लेकिन बापू को भारत के की आत्मा से जो आशाएं रही होंगी उसके लिए भारत के सीमाओं की बंदिश नहीं है. बापू के विचारपुत्र और पुत्रियाँ किन्हीं आशाओं के मोहताज नहीं हैं वे सक्षम हैं बापू के विचारों को सहेजने में. भारत को विकास के रास्ते पर आगे जाता देखने वाले लोग व्यस्तता की चाहे जितनी लम्बी उड़ान उड़ते रहे. थकने की सीमा समाप्त होने पर सारा रेगिस्तान उन्हें दिखेगा मुह हे राम बोलेगा.  
      

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